ईसा की वो सात शिक्षाएं जो, बदल देंगी जीवन देखने का नज़रिया 

 

हर साल 25 दिसंबर को दुनियाभर में धूमधाम से क्रिसमस का पर्व मनाया जाता है। विश्वभर के देश उत्साह, उमंग और उल्लास से ईसा मसीह का जन्मदिन मनाते हैं। क्रिसमस के दिन चर्च से लेकर घरों तक को क्रिसमस ट्री से सजाया जाता है। सेंटा क्लॉज बच्चों को तरह-तरह के उपहार देते हैं। ईसा मसीह के जीवन की कई शिक्षाएं ऐसी हैं जो हमारे जीवन को बदलने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। आइए जानते हैं ईसा मसीह के पवित्र विचारों को.

ईसा मसीह के वचन और संदेश प्रेमपूर्ण हैं, जो सीधे मनुष्य के हृदय में उतरते हैं। ईसा मसीह इंसान को भौतिकता के मोह को त्यागकर, सेवा और परोपकार का रास्ता चुनने का संदेश देते हैं। उनकी शिक्षाएं जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली हैं। ईसा मसीह लोगों के प्रति दयावान बनने की सीख देते हैं। वो कहते हैं कि जिनका मन शुद्ध है वो परमेश्वर को देखेंगे।

ईसा मसीह को उनसे विरोधियों ने गुलगुता नामक स्थान पर सलीब पर टांग दिया था। उनते क्रूस पर लिख दिया गया 'यीशु नासरी यहूदियों का राजा'। उस वक्त दोपहर के लगभग 12 बजे थे। अपनी मृत्यु के पूर्व के तीन घंटों में यीशु मसीह ने क्रूस पर जो सात अमरवाणियां कही थीं जो मानवता को भलाई का मार्ग दिखाती हैं।

ईसा मसीह की पहली वाणी थी- 'हे पिता इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।' उनकी दूसरी वाणी इस तरह थी,  'मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।' तीसरी वाणी, 'हे नारी देख, तेरा पुत्र। देख, तेरी माता।' चौथी वाणी,'हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?'।

ईसा मसीह ने अपनी पांचवी वाणी में कहा था, 'मैं प्यासा हूं'। छठी वाणी के रूप में उन्होंने कहा था, 'पूरा हुआ।' ईसा मसीह की आखिरी वाणी थी, 'हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं। प्रेम और मानवता के संदेशवाहक ईसा मसीह की ये सात वाणियां मानवता की राह दिखाती हैं।

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