संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन पर भारत के रूख को मंजूरी दी


प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मैड्रिड, स्‍पेन  में 2 से 13 दिसम्‍बर 2019 तक आयोजित होने वाले (चिली की अध्‍यक्षता में) जलवायु परिवर्तन पर संयुक्‍त राष्‍ट्र फ्रेमवर्क सम्‍मेलन के लिए 25वें कान्‍फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (सीओपी) में आज भारत की बातचीत के रूख को स्‍वीकृति दी।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्‍व पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  प्रकाश जावड़ेकर करेंगे। सीओपी 25 एक अहम सम्‍मेलन है जिसमें देश क्‍योटो प्रोटोकॉल के तहत 2020 से पहले की अवधि से निकलकर पेरिस समझौते के तहत 2020 के बाद की अवधि में प्रवेश की तैयारी करते हैं। भारत का रूख जलवायु परिवर्तन पर संयुक्‍त राष्‍ट्र फ्रेमवर्क सम्‍मेलन-  यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के सिद्धांतों एवं प्रावधानों खासकर स्‍वाभाविक न्‍याय के सिद्धांतों और  सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमता (सीबीडीआर-आरसी) से संचालित होगा।

 जलवायु परिवर्तन पर भारत का नेतृत्‍व हमेशा अस्‍पष्‍ट रहा है और पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हुई। भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन की समस्‍याओं से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में कई कदम उठाए हैं और ये कदम जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और महत्‍वाकांक्षा को दर्शाते हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव द्वारा हाल ही में आयोजित जलवायु कार्रवाई सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री ने 450 जीडब्‍ल्‍यू तक अक्षय ऊर्जा लक्ष्‍य को बढ़ाने की भारत की योजना की घोषणा की थी और सभी देशों से स्‍वाभाविक न्‍याय और सीबीडीआरसी के सिद्धांतों पर जिम्‍मेदार कार्रवाई करने का आग्रह किया था। भारत अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के जरिए सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की कोशिश में विश्‍व में अग्रणी है।  

आईएसए के अलावा भारत ने जलवायु कार्रवाई पर दुनिया को प्रेरित करने की अपनी कोशिशों के तहत दो नई पहलें शुरू की हैं। इसमें आपदा लचीला संरचना गठबंधन जो जलवायु के विभिन्‍न आयामों पर जानकारी जुटाने एवं साझा करने और आपदा लचीला संरचना को एक मंच प्रदान करेगा। भारत एवं स्‍वीडन द्वारा संयुक्‍त रूप से शुरू किए गए ‘औद्योगिक संक्रमण पर नेतृत्‍व समूह’ सरकार और कार्बन के कम उत्‍सर्जन कार्य को तेज करने के लिए दुनियाभर के देशों में एक साथ काम करने के लिए निजी क्षेत्र और प्रौद्योगिकी नवाचार क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच मुहैया करायेगा।

भारत अपनी कार्रवाई को लेकर काफी महत्‍वकांक्षी रहा है और जोर देता रहा है कि विकसित देशों को महत्‍वकांक्षी कार्रवाई करने में आगे आना चाहिए और 2020 तक सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर के जलवायु वित्‍तीय प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहिए। भारत विकसित देशों पर 2020 से पहले की जरूरतों को पूरा करने पर जोर देगा और 2020 के बाद की अवधि में विकासशील देशों पर अतिरिक्‍त भार नहीं पड़ना चाहिए।

कुल मिलाकर, भारत को सृजनात्‍मक और सकारात्‍मक दृष्टि के साथ और लंबी अवधि के विकास हितों की सुरक्षा करते हुए आगे मिलकर काम करने की उम्‍मीद है।