थानागाजी गैंगरेप प्रकरण 4 अभियुक्तों को आजीवन कारावास एवं एक-एक लाख रुपये का आर्थिक दण्ड

 विशिष्ठ न्यायालय अनूसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरण, अलवर द्वारा थानागाजी में 26 अप्रेल, 2019 को हुए जघन्य गैंगरेप प्रकरण में दोषी पाए 4 अभियुक्तों छोटे लाल, हंसराज, अशोक कुमार एवं इन्द्राज को आजीवन कठोर कारावास एवं एक-एक लाख रुपये के आर्थिक दण्ड से दण्डित किया गया है। फोटोग्राफ्स व वीडियो वायरल करने वाले मुकेश को पांच साल के कठोर कारावास की सजा के साथ ही पचास हजार रुपये के आर्थिक दण्ड से दण्डित किया गया है। 

मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के निर्देश पर इस प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेकर त्वरित अनुसंधान किया गया एवं प्रभावी साक्ष्य जुटाए गए। राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर महिलाओं पर अत्याचार व अपराध को रोकने के लिए प्रदेश के हर जिले में पुलिस उप अधीक्षक स्तर का अधिकारी लगाकर महिला अपराध अनुसंधान सैल का गठन किया है। इसके अतिरिक्त जघन्य अपराधों की प्रभावी मॉंनिटरिंग करने के लिए सीआईडी (सीबी) के तहत हीनियस क्राइम मानिटरिंग यूनिट का भी गठन किया गया। पुलिस मुख्यालय तथा संभाग मुख्यालयों पर नवगठित इकाईयां जघन्य अपराधों के प्रकरणों में न्यायालय में साक्ष्यों का  प्रभावी प्रस्तुतकीरण कर अपराधियों को सजा दिलाया जाना सुनिश्चित कर रही हैं। अलवर जिले को कानून-व्यवस्था की दृष्टि से दो जिला पुलिस में विभाजित किया एवं थानागाजी में वृत सर्किल की स्थापना की।

महानिदेशक पुलिस ने बताया कि थानागाजी प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अनुसंधान अधिकारी व उनकी टीम द्वारा प्रकरण में एफएसएल एवं साइबर सैल की सहायता से तथ्य जुटाकर त्वरित अनुसंधानिक कार्रवाई की। मात्र 16 दिन में अनुसंधान पूर्ण कर न्यायालय में पेश किया गया। प्रकरण में केस ऑफिसर स्कीम के तहत सीओ ग्रामीण अलवर को जिम्मेदारी सौंपी गई। महानिरीक्षक पुलिस जयपुर रेज श्री एस. सेंगाथिर एवं पुलिस अधीक्षक अलवर द्वारा प्रकरण की गंभीरता से मॉनिटरिंग की गई तथा पीड़ित परिवार को आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया गया। न्यायालय द्वारा प्रकरण में दिन प्रतिदिन सुनवाई की गई। वरिष्ठ लोक अभियोजक श्री कुलदीप जैन ने केस ऑफिसर और उनके रीडर के सहयोग से अभियोजन पक्ष के पक्ष में 32 गवाहों के बयान करवाए। प्रकरण में 176 दस्तावेज एवं 43 आर्टिकल प्रदर्शित किए गए।

प्रदेश में प्रारम्भ किए गई निर्बाध पंजीकरण की नीति से महिलाएं एवं कमजोर वर्ग के व्यक्ति सुगमता से अपना परिवाद दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरुप पीड़िताओं को न्याय दिलाने को प्राथमिकता देते हुए अनुसंधान की गुणवत्ता के साथ-साथ त्वरित अनुसंधान व प्रभावी अभियोजन पर बल दिया जा रहा है। दुष्कर्म के प्रकरणाें में वर्ष 2018 तक अनुसंधान का औसत समय करीब 278 दिन हुआ करता था जो अब घटकर 113 दिन रह गया है। इसे और कम करने का प्रयास किया जा रहा है।